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Saturday, August 22, 2009

आज की दुनिया

कि एक दिन राह में मैंने कहीं एक लाश थी देखी ,
लगा मुझको कहीं पर मैंने इसकी शक्ल है देखी ,
कि देखा ध्यान से उसको तो मेरी अक्ल चकराई ,
पड़ा जो राह में वो तो ख़ुद मैं ही हूँ भाई ,
न जाने कब कहा कैसे किधर को चल बसा था मैं ,
कई लोगों के बीच देखो आज आ के फंसा था मैं ,
कि मुझको देख कर सब लोग कुछ तो थे बोले ,
कई ने कुछ तो कई ने मेरे सारे राज थे खोले ,
कि मुझको देख कर एक यार बुक्के फाड़ के रोया ,
मैं समझा कि चलो ये ही मेरा एक यार है गोया ,
मगर वो था फरेबी दुष्ट और था महा पापी ,
वो बोला देख कर मुझको कि कुछ दिन बाद मर जाते ,
जो पैसे कल ही ले गए थे वो तो कुछ खर्च कर जाते ,
जो भी कर्जा लिया था तूने वो तुझको माफ़ करता हूँ ,
ये घड़ी , अंगूठी और चेन लेकर मैं हिसाब साफ़ करता हूँ ,
कि देख कर जेबों के पैसों को मेरे एक यार ये बोले ,
कि हाय छोड़ कर वादा अधूरा मर गया भोले ,
कि इन पैसों से आज तुझे मेरा वादा निभाना था ,
पहले सनीमा फ़िर कलब फ़िर बार जाना था ,
कि चल तेरी खातिर मैं तेरा वादा निभाऊंगा ,
कि तेरे नाम की दारु भी मैं ख़ुद ही चढाऊंगा ,
कि ये कह कर उन्होंने जेबों के सारे पैसे थे मारे ,
हम तो बस ये ही सोंचा किए क्या येही दोस्त थे सारे ,
"अभि" देखो जहाँ में आज तो बस ये ही ये अब है ,
नही इन्सान की कीमत यहाँ तो लाश ही सब है ।

Thursday, April 16, 2009

इन्सान और जिंदगी

चलते - चलते थक गया , एक पल को ही रुक जाऊँ मैं,
ना रास्ता न मंजिलें , जाऊं तो किधर जाऊं मैं ।
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हर रास्ता है कह रहा, की आ मेरे तू साथ चल,
हैं नये सफर नई मंजिलें, तू दिल ले नई आस चल।
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गर यूँ ही तू थकता रहा, या ऐसे रुकता ही गया,
तो एक दिन इस भीड़ में, तू खो के ही रह जाएगा ।
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गर हो न मंजिल रास्ते , तो भी कोई तू गम न कर ,
तू ख़ुद बना ले रास्ते , और ख़ुद ही मंजिल भी बना ।
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ना सोंच की हूँ थक गया , ना सोंच की रुक जाऊं मैं ,
ये सोंच की चलता रहूँ , कोई तो मंजिल पाऊँ मैं ।
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Tuesday, April 7, 2009

बेवफा

देख डसती है मुझे फ़िर आज ये तनहाइयाँ ,
हो चुकी है आज तक मेरी बहुत रुस्वाइयां ।
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साथ तेरा छोड़ा है कि जा तुझे खुशियाँ मिलें ,
दूर ही मुझसे सही पर तुझको नई दुनिया मिलें ।
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मेरी इस दुनिया में सिवा विरानगी के कुछ नही ,
तेरी दुनिया में कहीं कुछ फूल खुशियों के खिले ।
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बेवफा समझे मुझे तू यार इसका गम नही ,
तेरी खुशियाँ ऐ सनम मेरे लिए कुछ कम नहीं ॥
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Monday, March 23, 2009

परछाइयां

वह अंधेरे से लिपट कर रात भर रोता रहा ,
बेरहम सूरज न जाने किस जगह सोता रहा ।
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यह न समझा साथ उसका छोड़ देंगी एक दिन ,
वह सुबह से शाम तक परछाइयां ढोता रहा ।
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ये बुझे तारे बगावत कर नही सकते कभी ,
सत्य है होगा वही जो आज तक होता रहा ।
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एक उल्का सी ह्रदय में रह गई है रोशनी ,
बस उसी सुख की लहर में ख़ुद बा ख़ुद खोता रहा ।
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आइना भी कह न पाया रोक ले आंसू "अभी "
वह अभागा मोतियों को धूल में बोता रहा ।
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Friday, March 20, 2009

आस

बीते जो चन्द रोज़ मुझे होश संभाले ,
पीने पड़े मुझे जाने कितने जहर के प्याले ।
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सीखा ही था जब मैंने गिर - गिर के संभलना,
वो पाई ठोकरें की हुआ मुश्किल मेरा चलना ।
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था सामने एक बच्चा जो कुछ खेल रहा था ,
उस उम्र में भी मैं बड़े दुःख झेल रहा था ।
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बीता है बचपन मेरा अब आई है जवानी ,
सोंचता हूँ की होगी कब ये ख़त्म कहानी ।
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हूँ आज परेशान पर ये आस न छोड़ी ,
वो देगा मुझे जरूर खुशी चाहे दे थोडी ।
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Thursday, March 5, 2009

इल्तजा

इन तन्हाईयों से दूर , मुझे ले के कहीं चल ,
मेरी परछाइयों से दूर , मुझे ले के कहीं चल ।
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चल दूर कहीं इतना , कि फ़िर लौट न पाऊं ,
न रास्ते हो ख़त्म , न मंजिल को मैं पाऊँ ।
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न हो वफ़ा कि चाह , न हो प्यार कि हसरत ,
चलता ही जा रहा हूँ , बस चलता ही मैं जाऊं ।
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ऐ जिंदगी सुन इल्तजा , ना साथ छोड़ देना ,
जब भी उठे नजर ,तुझे साथ में मैं पाऊँ ।
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Sunday, March 1, 2009

इंतजार

कर रहा हूँ मैं कब से तेरा इंतजार ,

आजा कि न आयेंगे ये दिन बार बार ।

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आजा के फिजा में फ़िर ये बहार ना आएगी ,

लाख तड़पेगी तू पर मेरी परछाई भी न पायेगी ।

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मैं अपनी सारी यादें अपने साथ ले जाऊंगा ,

यूँ करूंगा तन्हा कि फ़िर कभी न आऊंगा ।

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आजा कि इंतजार की इन्तहा हो गई है ,

यूँ लगे हर पल कि जिस्म से जान जुदा हो गई है ।

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Friday, February 27, 2009

पछतावा

कर के वफ़ा तुझसे - मैं पछता रहा हूँ ,

नही जीने की चाहत पर जिए जा रहा हूँ।

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क्यों तूने किया रुसवा - क्यों बीच राह छोड़ा,

जिंदगी के इस सफर में अकेले चल रहा हूँ ।

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छोड़ा जो हाथ तूने - न किसी ने हाथ पकड़ा ,

खुशियों की महफिलों में मैं तनहा ही रह रहा हूँ ।

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दुआ है ये खुदा से - न कभी तू चैन पाए ,

छोड़ के तेरी दुनिया मैं तो चला ही जा रहा हूँ।

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Saturday, February 21, 2009

क्या है पता

ऐ मौत आ मुझको आकर बता ,
कहाँ घर तेरा , तेरा क्या है पता ।
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रोशनी है या कि है अँधेरा वहां ,
है खुशियाँ वहाँ , या फ़िर गम का जहाँ ।
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क्या वहां पर कहीं ऐसा संसार है ,
जहाँ पर सिर्फ़ प्यार ही प्यार है ।
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क्या वहां पर कहीं कुछ पराये भी हैं ,
या वहां पर सभी अपने साये ही हैं ।
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मुझसे सच सच बता , न तू करना दगा ,
वहां नफरत दिलों में है या है वफ़ा ।
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सच तो ये है कि छोड़ दूँ ये जहाँ ,
मिली नफरत वहां भी तो जाऊँगा कहाँ - जाऊंगा कहाँ .........
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Friday, February 20, 2009

मात

ये क्यों इतने इल्जाम पाए हैं हमने ,
की वादे वफ़ा के निभाए हैं हमने ।
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खिलाये थे गुल कि खुशबू मिलेगी,
मगर जख्म काटों से पाए हैं हमने ।
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बचाया बहुत था ग़मों से ये दामन ,
पर खुशी में भी अश्क बहाए हैं हमने ।
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हर तरफ़ हैं वही डराते वीभत्स चेहरे ,
ना जाने किस किस से नजरें चुराई हैं हमने ।
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की आए जो वक्त लडूं दूसरों से ,
तो अपनों से ही मात खाई हैं हमने ।
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ना जाने क्यों माफ़ कर रहा हूँ उनको ,
जिनसे सदा गम ही पाए हैं हमने ।
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Wednesday, February 18, 2009

इंतजार

रुक गई है जिंदगी कोई अरमान नही आते,
खो गई है मंजिलें आख़िर हम कहाँ जाते ।
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इंतजार में चन्द पलों के जिंदगी जाती रही ,
काश वो मुहब्बत भरे कुछ पल हमें मिल पाते ।
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कल हाँ कल यही सोंचते जिंदगी सिर्फ़ इंतजार बन गई ,
वो आएगी जरूर यही सोंचकर देखते रहे सबको आते जाते ।
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इंतजार में कल के आज के ये पल कट नही पाते ,
काश आज के इस सफर में तुम मेरे हमसफ़र बन जाते ।
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Saturday, February 14, 2009

इंतजार

रुक गई है जिंदगी कोई अरमान नही आते ,
खो गई है मंजिलें आख़िर हम कहाँ जाते।
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इंतजार में चंद पलों के जिंदगी जाती रही ,
काश वो मुहब्बत भरे कुछ पल हमें मिल पाते ।
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कल हाँ कल यही सोंचते जिंदगी सिर्फ़ इंतजार बन गई ,
वो आएगी जरूर यही सोंचकर देखते रहे सबको आते - जाते।
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इंतजार में कल के आज के ये पल नही कट पाते ,
काश आज के इस सफर में तुम मेरे हम सफर बन जाते ।
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Friday, February 13, 2009

वफ़ा

यार तन्हाई से डरोगे तो मर जाओगे ,
प्यार इस दुनिया मैं कहीं न पाओगे ।
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भागोगे कितना दूर तुम इस तन्हाई से ,
ऊब जाओगे इस दुनिया की बेवफाई से ।
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कर लो इससे यारी ये वफ़ा दिखायेगी ,
हर वक्त हर कहीं ये साथ निभाएगी ।
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जब कभी गम और परेशानियाँ घेरेंगी तुम्हें ,
रख के सर तेरा अपनी गोद में प्यार से सहलाएगी ।
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जब कभी चाहो इसे आवाज देकर देखना ,
ये कभी माँ कभी बहन तो कभी प्रेमिका बन आएगी ।
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वफ़ा होती है क्या न इससे ज्यादा कोई बताएगा ,
जायेगी साथ तेरे अगर उस जहाँ में "अभी" तू जाएगा ॥
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Thursday, February 12, 2009

परछाईं

तन्हा रहो तो जानो की तन्हाईयाँ क्या कहती हैं ,
कभी सहा होगा न इतना - गम ये सहती हैं ।
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कभी देखो तो इन वीरानों को - कभी देखो तो इन बेगानों को ,
कभी ये भी अपने हुआ करते थे - जाते क़दमों की आहटें ये कहती हैं ।
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आज फ़िर मैंने ग़मों को दुखी देखा - दूर दूर तक न थी कहीं कोई खुशी देखा ,
यहीं शायद कहीं वो खोया था - उसकी मिटती हुई परछाइयाँ ये कहती हैं ।
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रुका था वहां पर उसे ढूँढा भी बहुत था - पर वो आता ही कैसे जो इस जहाँ में ही नही था ,
चल कहीं और चलें अब वो न आएगा - दूर दूर तक फैली तन्हाईयाँ ये कहती हैं ।
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Tuesday, February 10, 2009

दीवानगी

तन्हाई में ऐ सनम तुम हमको बहुत तड़पाते हो ,
बैठे रहते हो दूर तमाशाई बनके मेरे पास नही आते हो ।
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कहते हैं सब की हो गया हूँ मैं तेरा दीवाना,
ये तो सिर्फ़ जानता हूँ मैं की क्या है तेरा फ़साना ।
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जब भी आती है तेरी याद बंद हो जाती हैं ये आँखें ,
रोकता हूँ बहुत पर बोल देती हैं सब ये उखड़ी सांसें ।
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हम जानते हैं की बिन हमारे तन्हा तुम भी न रह पाओगी ,
अगर हुई मिलने की कसक तो भागे चले आओगे ....भागे चले आओगे ........

Sunday, February 8, 2009

जिंदगी

चला जा रहा था तन्हा
जिंदगी की राहों में,
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एक कली ने छेड़ा मुझे
ले लिया अपनी बाँहों में,
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ले के बाँहों में मुझे
हौले से वो मुस्करायी ,
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देख कर उसको लगा ऐसा
जैसे पतझड़ में बहार आई,
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थी उसके प्यार में
कुछ ऐसी अदा,
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हो गया मेरा सब कुछ
ख़ुद मुझ से ही जुदा,
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गया था भूल मैं की
आती नही पतझड़ में बहार,
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चली गई वो मुझसे दूर
बिता के साथ दिन दो चार ,
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राहों की वो तन्हाई
फ़िर एक बार मैंने पाई,
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और कुछ भी करना जिंदगी में
पर कभी किसी से दिल न लगाना भाई ......
दिल न लगाना भाई ...............................
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Saturday, February 7, 2009

ईमान

देखा जब भी मैंने जिंदगी को ध्यान से ,
ना बचा कुछ भी जिंदगी में ईमान से ,
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डरता हूँ देख हर तरफ़ चेहरे ये अजनबी ,
लगता है जैसे ना था कोई अपना कभी ,
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हो गए हैं कठीन कितने जिंदगी के रास्ते ,
बिकने लगा है प्यार भी जिंदगी के वास्ते ,
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शुरू किया था जब ये सफर ऐ जिंदगी ,
मालूम ना था आएगा एक ये मकाम भी ,
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जाना पड़ेगा छोड़कर उन सबको तनहा यार ,
किया था जिंदगी में कभी जिन्हें बहुत प्यार ,
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जब तक चल सके हम ये वादा निभाएंगे ,
छोडके तन्हाई में हम उनको ना जायेंगे ........
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Friday, February 6, 2009

अब क्या कहना

बहुत कह लिया अब क्या कहना ,

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शब्दों पर विश्वास खो गया ,

अर्थ खोखले बने पड़े हैं ,

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कही अनकही ख़त्म हो चुकी ,

अपने से हम बहुत लड़े हैं,

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नहीं शिकायत कोई उन से ,

हमने सीख लिया है सहना ,

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आते - जाते छड़ ने रुक कर ,

पूछी बहुत पुरानी बातें ,

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चुप चुप रोते बीती हैं ,

अपनी तो अधियारी रातें ,

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जो कुछ अपने हिस्से आया ,

उस की शर्त सदा चुप रहना ,

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बहुत कह लिया अब क्या कहना ...............

Thursday, February 5, 2009

फ़साना

आना हो तेरे पास तो आऊँ कैसे ,
पाना हो तेरा दीदार तो पाऊँ कैसे ।
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कुछ इस कदर हुआ हूँ मैं मजबूर ,
हो गया हूँ ख़ुद अपनी जिंदगी से दूर ।
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बहुत आती है याद वो तेरी हसीन मुस्कराहट,
प्यार करने को आते वो तेरे क़दमों की आहट।
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वो आ के पास तेरा धीरे से बैठ जाना ,
कुछ मेरी सुनना कुछ अपनी सुनाना ।
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न भूल पाया हूँ और ना ही भुला पाऊँगा ,
उन बीते हुए पलों को जो बन गए हैं फ़साना ।
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Tuesday, February 3, 2009

तेरा जाना

दिल में तेरा ख्याल बसाए हुए हैं हम ,
सीने में एक चोट सी खाए हुए हैं हम ।
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शिकवा करें जमीन से या आसमान से,
किससे कहें की तेरे सताए हुए हैं हम ।
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बहुत प्यारी थी तेरी हर एक अदा हमारे लिए ,
पर अफ़सोस तुझे जी भर के ना देख पाए हम ।
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चाहा तो बहुत की तुझे खुशी से विदा करें,
पर बहना आंखों से आंसुओं का न रोक पाए हम ।
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जाना तेरा ग़मों की हद थी हमारे लिए,
पर तेरी खुशी के लिए मुस्कुराते रहे हैं हम ।
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तुझको गए हुए भी बहुत दिन गुजर गए ,
अब तक तुझे सीने से लगाये हुए हैं हम ।
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दिल में तेरा ख्याल बसाये हुए हैं हम ..........