Tuesday, April 7, 2009

बेवफा

देख डसती है मुझे फ़िर आज ये तनहाइयाँ ,
हो चुकी है आज तक मेरी बहुत रुस्वाइयां ।
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साथ तेरा छोड़ा है कि जा तुझे खुशियाँ मिलें ,
दूर ही मुझसे सही पर तुझको नई दुनिया मिलें ।
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मेरी इस दुनिया में सिवा विरानगी के कुछ नही ,
तेरी दुनिया में कहीं कुछ फूल खुशियों के खिले ।
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बेवफा समझे मुझे तू यार इसका गम नही ,
तेरी खुशियाँ ऐ सनम मेरे लिए कुछ कम नहीं ॥
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1 comment:

  1. "बेवफा समझे मुझे तू यार इसका गम नही ,
    तेरी खुशियाँ ऐ सनम मेरे लिए कुछ कम नहीं ॥"


    waah.. kya baat hai!!
    Ishq aur dard dono bharpoor hai apki rachna mein...

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