Sunday, February 8, 2009

जिंदगी

चला जा रहा था तन्हा
जिंदगी की राहों में,
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एक कली ने छेड़ा मुझे
ले लिया अपनी बाँहों में,
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ले के बाँहों में मुझे
हौले से वो मुस्करायी ,
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देख कर उसको लगा ऐसा
जैसे पतझड़ में बहार आई,
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थी उसके प्यार में
कुछ ऐसी अदा,
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हो गया मेरा सब कुछ
ख़ुद मुझ से ही जुदा,
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गया था भूल मैं की
आती नही पतझड़ में बहार,
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चली गई वो मुझसे दूर
बिता के साथ दिन दो चार ,
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राहों की वो तन्हाई
फ़िर एक बार मैंने पाई,
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और कुछ भी करना जिंदगी में
पर कभी किसी से दिल न लगाना भाई ......
दिल न लगाना भाई ...............................
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1 comment:

  1. कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
    एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
    एक झूठ है आधा सच्चा सा .
    जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
    एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .
    जीवन का एक ऐसा साथी है ,
    जो दूर हो के पास नहीं .
    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
    हवा का एक सुहाना झोंका है ,
    कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
    शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
    कभी अपना तो कभी बेगानों सा .
    जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
    जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
    एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
    यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
    यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
    पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .
    यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
    पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं

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